Friday, April 11, 2014

निशा

जब वक्त निशा की आती है
आसमां में सितारे  दीखते हैं।  
हम तो टुकड़े  चाँद हैं 
उस निशा में सैर करते है। 

खामोश है ये नाव मेरी 
 चुपके चुपके चलती है 
अपना एक टुकड़ा पाने को 
जाने कितने निशाएँ आती है।  

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