Tuesday, July 3, 2018

इन्याक् जापिद् आकाद जिवी


इन्याक् जापिद्  आकाद जिवी,
इन्याक् गोच् आकान ओन्तोर.
इङ्गे कुलि इदिन्ग् तिहिङ्ग् ,
इङ्ग् ए चेङ्घाव इदिन्ग् ओर -ओर ।

आम् गे तोम एमादिन्ग ताहे सान्हेत् ,
आम गे तोम चाल आदिन्ग ताहेन दुलाड़ डाली ।
तिहिङ्ग् आम ठेन खोज कान जिओन,
तिहिङ्ग् आम ठेन खोज कान जिओन् नाड़ी।

इङ्ग्- इङ्ग् आतेन एत् कान ताम् आमाक् राक् ,
इङ्ग् इङ्ग् आन्जोम एत् कान ताम् आमाक् गेराङ्.
अमिन्ग दुलाड़ मे ताहे नोवा काथा लअय साना इदिन्ग
नोवा धुड़ी- धारति खोन बिदाक् माराङ्.

आमाक् इन्याक् दुलाड़ दे लाङ तोल जोड़ ाव,
सोनेरो सिकरी आर रूपेरो सिकरी तेलान्ग झान कात्.
सिङ्ग् चान्दो आर  ि ञन्दा चान्दो रान्त् लेका,
नोवा सेरमा पुरी रे जायजुग लगित् झाक-झाकात्.

बिंदी गानाक् दाक् लेका दुलाड़ ताहे गाक् -गाबान
चारियो - खोण्ड् पृथिमि रे दुलाड़ ताहेन ले-लेगेच् .
आर चेक् चोञ नेहोर मे बादति,
बानुक् तिहिङ्ग् जाहानाक् आम ठेन खोन सारेच्.

दे देला तिहिंग ओंतोर अंाजोम तिंग में।
दे देला जीवी आते न तिंग में।
होय लेका किछु ए मेनेक् मेनेक् ,
साकाम लेका किछु ए इशारा एत् मे .

By Saheb Ram Tudu,
4th July 2018, Kolkata
  

Monday, May 28, 2018

तिनाक काथा ताहे एना बाकी,

तिनाक  काथा ताहे एना बाकी,
तिनाक फागुन ताहे ऐना बांग येंल।
 तिनाक कुनामी पारोमेना ,
नोआ मेत रे तेरडेज बांग येंल।

नोवा ते आमेम मेन केआ,
इंग दो आम ओहोइ दुलाड़ में।
नोवा ते आमेम मेन केआ,
इंग दो आम ओहोइ उयहार में। 

बुरु लेका नित हों तेंगो गे मीणां ,
गीतिल लेका आवरिंग इंग गेजेरोत। 
जुदि बारीच एम् कोयाक होर एत,
रास्का तें दारामा ओकाम कोयेत। 

आर साहेन्द तीनाक इयांक मैनाक ,
लेखा-लेखा तें जिमा आमा। 
आर नोवा ओंतोर रे अामाक उयहार ,
बाई -बाई तें चाल आमा।

डार पेरेच नुडूक़ बाहा,
आर दो आलम आगुआं। 
सानाम जिनिस इंग आतु कादा,
नोवा फागुन ओका को मेताक नालोम साजावां।    
   
by-Saheb Ram Tudu,
29/05/2018

Saturday, March 31, 2018

पलास्टिक

एक शैतान जो भगवान बना बैठा है,
हजारों शक़्लों में उनकी मुखौटे हैं। 
जो अपनी जड़ें काफी मजबूत किए बैठा है ,
उनके कई दलालें हैं जो उसे सरोताज़ किये बैठें हैं। 

पलास्टिक , उससे बड़ा कोई देवता नहीं दीखता ,
काजू के पैकेट हो या चिप्स के पैकेट ,
या शालीमार के नारियल तेल के हो डिब्बे। 
हमारे रोम रोम में बस चुकी है ये पलास्टिक ,
मेरे पोर्टफोलियो के फाइल से लेकर 
न जाने कौन - कौन से चीजों में 
बिल कर चुकी है धुन की तरह अंदर और बाहर । 

आज तो उसी के ही ताजमहल हैं , उसी के ऐफिल टावर !
तो फिर मैं क्या कहूं?
आज तो वो भगवान के गले का हार भी बन बैठे हैं। 


© साहेब राम टुडू 
कोलकाता 01/04/2014 

Tuesday, March 27, 2018

हे भारत माँ! तुम कैसी माँ हो?

हे भारत माँ ! तुम कैसी माँ हो?
अपने संतानों से भेदभाव !
एक स्तन से अमृत,
तो दूसरे में से बिष क्यों पिलाती?

एक को पंडित,
तो दूसरे को अज्ञानी क्यों बनाती?
एक को न्यायमुर्ति,
तो दूसरे को अपराधी क्यों बनाती?

एक को अमीर तो दूसरे को गरीब,
एक को तृप्त तो दूसरे को भूखे रखती?
एक को निर्वस्त्र,
तो दूसरे को क्यों सुसज्जित करती?

हे माँ ! तुम कैसी माँ हो!
एक को ज्योति,
 और एक को अंधकार क्यों देती?
एक को आशीर्वाद,
 तो दूसरे को अभिशाप क्यों देती?

एक को हाथ,
और दूसरे से अंगूठा भी छीन लेती.
एक को राजा,
तो दूसरे को रंक क्यों बनती?

हे माँ ! तुम कैसी माँ हो !
एक के लिए उज्जवल भविष्य,
तो दूसरे के लिए नरक की कामना?
एक से स्नेह,
तो दूसरे से बैर की भावना।

तुम तो माँ हो, ऐसी भावना क्यों?
हृदय के टुकड़े तो दोनों ही हैं?
दोनों में तुम्हारा खून है,
फिर एक से प्रेम और दूसरे से घृणा क्यों है?

एक को स्वामी,
तो दूसरे को दास क्यों?
एक को राज सिंहासन,
तो दूसरे को वनवास क्यों ?

हे माँ तुम कैसी माँ हो?
एक स्तन से अमृत,
तो दूसरे में से बिष क्यों पिलाती?

माँ तुम जिन्दा हो !
या फिर मर गयी?
क्या तुम सुन रही
या फिर सुनना भी नहीं चाहती ?

ये कौन  सा वछ-स्थल है?
जो एक के मरने पर हँसती हो,
और दूसरे के मरने पर छाती पीटती हो.

माँ! क्या तुम मेरी माँ हो?

©साहेब राम टुडू
कोलकाता 2018




Wednesday, March 21, 2018

Ontor Ting Bhangod Akan

Ontor ting bhangod akan,
Mare mandir leka.
Ar nit ho koyok' hor et mea,
Amem hijuk' leka.

Dar khon nur akan baha,
Ar bai jodaw ruadok' leka.
Enhon koyog' hor et' mea,
Amin galang me leka.

Badai gean adi sanging em calao ena,
Bang em hech ruadok' leka.
Enho~ duara re tengo mena.n,
Aming daram me leka.

Hasurok' kan sing chandoi bagi an kan,
Nutat re bagi ading leka.
Enho~ diyada jered eda,
Amak' thoda marsal nam leka.

Jhadgao akan dare leka,
Umul ing panja eda ad' akan leka.
Tis bahak' dar perec' rokoc'-condon!
Fagun bonga hijuk' leka.

Tuesday, August 22, 2017

कृष्ण! तुम होते तो शायद,
इतने लोगों की मौत नहीं होती
गोवर्धन अपने हाथों में उठा लेते
अपने लोगों ली रक्षा करते।

पर देखो आज के जन प्रतिनिधि को
जो हेलीकॉप्टर में उड़ते हैं,
साईकिल में दौरा लगते हैं,
ऐरावत में चढ़े अपने लोगों को डूबते देखते हैं।
और रात के अँधेरे में लालटेन लिए,
 कोई गरीबों का हाल जानने
 कोई गरीबों का मसीहा
नहीं निकलता।

सभी वाहट्सएप्प की मैसेज चेक
करने में ब्यस्त हैं।
अगर तुम होते तो शंखनाद करते
आखिर हम गरीब
अपने कुटिआ से निकल पहाड़ पर चढ़ जाते,
तुम्हें पहाड़ उठाने  की जरुरत नहीं पड़ती।

चरणकमल  में कीचड़ न लगे
हरी घांस की कार्पेट पर पैर रख लोग नौका चढ़ते हैं,
गरीबों का दुःख देखने वो सैर पे निकलते हैं।

तुम होते तो हम एक टुकड़ा कपडा,
और सर ढकने की छत,
और एक बित्ता पेट के लिए
चूड़ा और गुढ़ की प्रतिक्षा नहीं करते।

तुम्हारे यहाँ हमें माखन और दही मिलती।
कृष्ण  हमें यूँ ही मौत के गोद में नहीं सोना पड़ता।

कृष्ण ! काश तुम होते।


Wednesday, June 28, 2017

क्रांति ! क्रांति ! की ही गूंज है चारों और ,
प्राणों के भीतर, अंतरात्मा  के अंदर ,
आओ भाइयों हम याद करें उन वीर शहीदों को !

धुप हो या हो गर्मी, बारिश हो या हो ओला ,
ठंडी हो या हो शीत, भूख हो या हो तृष्णा ,
दुश्मनों को खदड़ने पूर्वजों ने जंग किये थे !

जंगल हो या हो पहाड़, नदी हो या हो नाला ,
धरती हो या हो मिट्टी, जल हो या हो सागर ,
दुश्मनों को ख़त्म करने पूर्वजों ने उमंगें भरे थे !

जाति हो या हो धर्म, संस्कृति हो या हो सभ्यता ,
रीती हो या हो रिवाज, भाषा हो या हो समाज,
संरक्षण और सँवारने को योद्धाओं ने जोश भरे थे!

तीर हो या हो कमान,भाला हो या हो तलवार,
टांगा हो या हो छुरी , लाठी हो या हो ढाल ,
बच्चे हो या हो महिला सभी ने युद्ध के मैदान में कूद पड़े थे !

सिंगा हो या हो तुरही, करताल हो या हो झांझ ,
मादल हो या हो नगाडा, रागड़ा हो या हो घंटी ,
दुश्मनों को नष्ट करने पूर्वजों ने खून की होली खेले थे !