योग Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - February 22, 2011 उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥६- ५॥सवयंम से अपना उद्धार करो,सवयंम ही अपना पतन नहीं।मनुष्य सवयंमही अपना मित्र होता हैऔर सवयंम ही अपना शत्रू। Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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