Friday, July 5, 2013

एक यमुना

मैं ने एक ब्यक्ति से पूछा
दादा ! ये कौन सी नदी है?
उसने कहा , ये नदी नहीं है ,
हमलोगों का बहाया कचरा है ।
तभी मुझे याद आया ...
इसलिए आज यमुना एक नाला बन गई ,
और आज ये नाला बरबस जाने क्यों
मेरे लिए एक यमुना !

-साहेब राम टुडू 

Monday, July 1, 2013

कुछ शब्द

चुने थे कुछ फुल, हाथ मेरे लाल हुए ,
कुछ थे शब्द उसके कहे , आज हंसी के गुलाल हो गये,
ये क्यों कल की बात लगे, जबकि उम्र बीते अरसे हो गये।

- साहेब राम टुडू